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गैरसैंण से ऐसी ‘दिल्लगी’ ठीक नहीं
जब नेता ‘बहरूपिये’, अफसर ‘मौकापरस्त’ और जनता ‘मूर्ख’ हो जाए तो राजधानी के सवाल का स्थायी हल मिलना मुश्किल ही…
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नशे से इतर भांग की खेती के हैं कई फायदे
उत्तराखंड की पूर्ववर्ती सरकार ने कारोबारी तौर पर भांग की खेती के लिए कदम उठाए ही थे, कि भद्रजनों और…
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जादूगर खेल दिखाता है
जादूगर खेल दिखाता है अपने कोट की जेब से निकालता है एक सूर्ख फूल और बदल देता है उसे पलक…
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‘लोक’ की भाषा और संस्कृति को समर्पित किरदार
ब्यालि उरडी आई फ्योंली सब झैड़गेन/किनगोड़ा, छन आज भी हंसणा…। बर्सु बाद मी घौर गौं, अर मेरि सेयिं कुड़ि बिजीगे…।…
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17 साल बाद भी क्यों ‘गैर’ है ‘गैरसैंण’
गैरसैंण एकबार फिर से सुर्खियों में है। उसे स्थायी राजधानी का ओहदा मिल रहा है? जी नहीं! अभी इसकी दूर…
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उत्तराखंड में एक और फूलों की घाटी ‘चिनाप’
विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी से तो हर कोई परिचित है। लेकिन इससे इतर एक और फूलों की जन्नत है…
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शिकायतें तब भी थीं, अब भी हैं
उत्तराखंड अलग राज्य बनने से पहले यूपी सरकार को लेकर जितनी शिकायतें ‘पर्वतजन’ के मानस पर अंकित थीं, उससे कहीं…
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सिर्फ आलोचना करके तो नहीं जीत सकते
उत्तराखंड क्रांति दल खुद को अपनी ‘आंदोलनकारी संगठन’ की छवि से मुक्त कर एक जिम्मेदार और परिपक्व राजनीतिक पार्टी के…
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जहां बिखरी है कुदरत की बेपनाह खूबसूरती
उत्तराखंड के हिमालय में कई छोटे-बड़े बुग्याल मौजूद हैं। औली, गोरसों बुग्याल, बेदनी बुग्याल, दयारा बुग्याल, पंवालीकांठा, चोपता, दुगलबिट्टा सहित…
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ओ साओ ! तुम कैक छा ?
पहाड़ के रसूल हमताजोव हैं शेरदा अनपढ़ तुम सुख में लोटी रया, हम दुःख में पोती रयां ! तुम स्वर्ग,…
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