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कौन संभालेगा पहाड़ों को…
पहाड़ों पर कौन बांधेगा ‘पलायन’ और ‘विस्थापन’ को… अब तक या कहें आगे भी पलायन पहाड़ की बड़ी चिंता में…
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बाबा केदार के दरबार में
जगमोहन ‘आज़ाद‘// खुद के दुखों का पिटारा ले खुशीयां समेटने गए थे वो सब जो अब नहीं है…साथ हमारे,बाबा केदार के…
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क्या फर्क पड़ता है
ये इतनी लाशें किस की हैं क्यों बिखरी पड़ी हैं ये बच्चा किसका है मां को क्यों खोज रहा है….मां…
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वाह रे लोकतंत्र के चौथे खंभे
मित्रों कभी कभी मुझे यह सवाल कचोटता है कि आखिर हम पत्रकारिता किसके लिए कर रहे हैं। निश्चित ही इसके…
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बाबा, बाबा आप कहां हैं..
उत्तराखंड में जलप्रलय के बाद मचा तांडव हमारे अतीत के साथ ही भविष्य को भी बहा ले गया है। कहर…
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मूर्ति बहने का राष्ट्रीय शोक
ऋषिकेश में एक मूर्ति बही तो देश का पूरा मीडिया ने आसमान सर पर उठा लिया। खासकर तब जब…
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मैं, इंतजार में हूं
मैं, समझ गया हूं तुम भी, समझ चुके हो शायद मगर, एक तीसरा आदमी है जो, चौथे और पांचवे के…
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बेटियां
कई बार देखा बेटियों को बेटा बनते हुए मगर, बेटे हर बार बेटे ही बने देखे इसलिए जोर देकर कहूंगा…
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सांसू त् भ्वोर
बिसगणि बिसैकि सै उकळी जैलि उकाळ एक न एक दिन सांसू त् भ्वोर जाग मा च मयेड़ बैठीं देळी मा…
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Chola-Badal: Review
Chola-Badal: Satire on Blind Followership of Political Leaders Critical review of Garhwali satirical proseCritical Review of Garhwali Satirical prose written…
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