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वेलेन्टाइन
हे वीं तू बि अदान छैं त्वेखुणि बि क्य ब्वन्न हैप्पी वेलेन्टाइन!! Copyright@ Dhanesh Kothari
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सम्मान
नगरपालिका परिषद ऋषिकेश द्वारा साहित्य के लिए समर्पित स्व. डा. पार्थ सारथि (डबराल) सम्मान 26 जनबरी 2011
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गैरसैंण जनता खुणि चुसणा च
जब बिटेन उत्तराखंड अन्दोलनै पवाण लग अर राज्यौ राजधनी छ्वीं लगी होली त गैरसैंण कु इ नाम गणेंगे। गैरसैंण राजधानी…
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न्युतो
दगड्यों! पैथ्राक दस सालों बटि नामी-गिरामी चिट्ठी-पतरी(गढ़वळी पत्रिका) कि गढ़वळी भाषै बढ़ोत्तरी मा भौत बड़ी मिळवाक च। यीं पतड़ीन् गढ़वळी…
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गढवाल में मकरैण (मकर संक्रांति) और गेंद का मेला
गंगासलाण याने लंगूर, ढांगु, डबरालस्युं, उदयपुर, अजमेर में मकरसंक्रांति का कुछ अधिक ही महत्व है। सेख या पूस के मासांत…
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क्या नपुंसकों की फ़ौज गढ़वाली साहित्य रच रही है ?
भीष्म कुकरेती जो जीवविज्ञान की थोड़ी बहुत जानकारी रखते हैं वे जानते हैं कि, जीव-जंतुओं में पुरुष कि भूमिका एकांस…
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