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सिखै
सि हमरा बीच बजार दुकानि खोली भैजी अर भुला ब्वन्न सिखीगेन मि देळी भैर जैकि भैजी अर भुला ब्वन्न मा…
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पण कब तलक
मेरा बिजाल्यां बीज अंगर्ला सार-खार मेरि भम्मकली गोसी कबि मेरु भुक्कि नि जालू कोठार, दबलौं कि टुटलि टक्क पण, कब…
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बाघ
बाघ गौं मा जंगळुं मा मनखि ढुक्यां छन रात–दिन डन्ना छन घौर–बौण द्वी लुछणान् एक हैंका से आज–भोळ अपणा…
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काव्य आन्दोलनों का युग १९७६- से २०१० तक
सन १९७६ से २०१० तक भारत को कई नए माध्यम मिले और इन माध्यमों ने गढ़वाली कविता को कई तरह…
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अनसिक्योर्टी
डाल्यों फरैं अंग्वाळ बोट ताकि, डाल्यों तैं अनसिक्योर्टी फील न हो Copyright@ Dhanesh Kothari
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मेरि पुंगड़्यों
मेरि पुंगड़्यों हौरि धणि अब किछु नि होंदपण, नेता खुब उपजदन् मेरि पुंगड़्यों बीज बिज्वाड़खाद पाणिलवर्ति-मंड्वर्ति किछु नि चैंदस्यू नाज पाणि…
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१९५१ से १९७५ तक
सारे भारत में स्वतंत्रता उपरान्त जो बदलाव आये वही परिवर्तन गढ़वाल व गढ़वाली प्रवासियों में भी आये, स्वतंत्रता का सुख,…
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