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पहाड़
मेरे दरकने पर तुम्हारा चिन्तित होना वाजिब है अब तुम्हें नजर आ रहा है मेरे साथ अपना दरकता भविष्य लेकिन…
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विकास का सफर
विकास का सफर ढ़ोल ताशों की कर्णभेदी से शुरू होकर शहनाई की विरहजनित धुन के साथ कार्यस्थल पर पहुंचता…
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काश लालबत्तियां भगवा होती
बसंत के मौल्यार से पहले जब मैं ‘दायित्वधारी‘ जी से मिला था तो बेहद आशान्वित से दमक रहे थे। भरी…
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कुत्ता ही हूं, मगर…..
कल तक मेरे नुक्कड़ पर पहुंचते ही भौंकने लगता था वह। जाने कौन जनम का बैर था उसका मुझसे।…
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अब तुम
अब तुम सिंग ह्वेग्यां रंग्युं स्याळ् न बण्यांन् सौं घैंटणौं सच छवां कखि ख्याल न बण्यांन् उचाणा का अग्याळ् छवां…
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गुरूवर! विपक्ष क्या है
आधुनिक शिष्य किताबी सूत्रों से आगे का सवाल दागता है। गुरूजी! विपक्ष क्या होता है? प्रश्न तार्किक था, और…
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घंगतोळ्
तू हैंसदी छैं/त बैम नि होंद तू बच्योंदी छैं/त आखर नि लुकदा तू हिटदी छैं/त बाटा नि रुकदा तू मलक्दी…
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’श्रीहरि’ का ध्यान नहीं लग रहा
मैं जब १९९५ में सीमान्त क्षेत्र बदरीनाथ पहुंचा था। तो यहां के बर्फीले माहौल में पहाड़ लकदक दिखाई देते थे।…
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