• चुनावी मेले में परिवर्तन के स्वर

              अब अपनी दुखियारी की रोज की भांज हुई कि वह अबके परिवर्तन को कांज के रहेगी। फरानी बुनावट में…

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  • घुम्मत फिरत

    थौळ् देखि जिंदगी कू घुमि घामि चलिग्यंऊं खै क्य पै, क्य सैंति सोरि बुति उकरि चलिग्यऊं लाट धैरि कांद मा…

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  • गिद्ध गणना का सच

    अर्ली मॉर्निंग, मानों सूरज के साथ घोड़ों पर सवार खबरी मेरे द्वार पहुंचा। उसके चेहरे पर किरणों की तेजिस्वता की…

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  • तेरि सक्या त…

    ब्वकदी रौ मिन हल्ळु नि होण तेरि सक्या त गर्रू ब्वकणै च दाना हाथुन् भारु नि सकेंदु अबैं दां तू…

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  • सीएम वंश की असंतुष्टि

    लोक के तंत्र में ‘सीएम’ वंशीय प्राणियों की असंतुष्टि का असर क्लासरूम तक में पहुंच चुका था। मास्टर जी बेंत…

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  • उल्लू मुंडेर पर

          उल्लू के मुंडेर पर बैठते ही मैं आशान्वित हो चुका था। अपनी चौहदी में लक्ष्मी की पर्दार्पण की दंतकथाओं…

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  • बे – ताल चिंतन

             काल परिवर्तन ने अब बेताल के चिंतन और वाहक दोनों को बदल दिया। आज वह बिक्रम की पीठ पर…

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  • डाळी जग्वाळी

    हे भैजी यूं डाळ्‌यों अंगुक्वैकि समाळी बुसेण कटेण न दे राखि जग्वाली आस अर पराण छन हरेक च प्यारी अन्न…

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  • हिसाब द्‍या

    हम रखणा छां जग्वाळी तैं हर्याळी थैं हिसाब द्‍या, हिसाब द्‍या हे दुन्यादार लोखूं तुम निसाब द्‍या……. तुमरा गंदळा आसमान…

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  • पण…….

    ग्वथनी का गौं मा बल सुबेर त होंदी च/ पण पाळु नि उबौन्दु ग्वथनी का गौं मा बल घाम त…

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