आजकल
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कैसा है कीड़ाजड़ी का गोरखधंधा
देवभूमि उत्तराखंड अपनी नैसर्गिकता के साथ ही प्राकृतिक संपदा से भी परिपूर्ण है। इसी संपदा में शामिल हैं वह हजारों…
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यहां है दुनिया का एकलौता ‘राहू मंदिर’
कभी नहीं सुना होगा कि देश के किसी गांव में देवों के साथ दानव की पूजा भी हो सकती है।…
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किसे है सभ्य बने रहने की जरुरत
जमाने के साथ बदलते पहाड़ी संगीत के बहाने कई बार बहसें शुरू हुई। उनके अब तक भले ही पूरी तरह…
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लोक स्वीकृत रचना बनती है लोकगीत
लोकगीतों के संदर्भ में कहा जाता है, कि लोक जीवन से जुड़ी, लोक स्वीकृत गीत, कृति, रचना ही एक अवधि के बाद स्वयंमेव लोकगीत बन…
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नई लोकभाषा का ‘करतब’ क्यों ?
उत्तराखण्ड को एक नई भाषा की जरुरत की बात कई बार उठी। यह विचार कुछ वैसा ही है जैसे राज्य…
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गैरसैंण राजधानी : जैंता इक दिन त आलु..
अगर ये सोच जा रहा हैं कि गैरसैंण में कुछ सरकारी कार्यालयों को खोल देने से. कुछ नई सड़कें बना…
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गैरा बिटि सैंणा मा
उत्तराखण्ड की जनसंख्या के अनुपात में गैरसैंण राजधानी के पक्षधरों की तादाद को वोट के नजरिये से देखें तो संतुष्ट…
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भ्रष्टाचार, आदत और चलन
समूचा देश भ्रष्टाचार को लेकर आतंकित है, चाहता है कि भ्रष्टाचार खत्म हो जाए। मगर, सवाल यह कि भ्रष्टाचार आखिर…
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बदलाव, अवसरवाद और भेडचाल
अवसरवाद नींव से लेकर शिखर तक दिख रहा है। वैचारिक अस्थिरता के कारण, नेता ही नहीं, पूर्व अफसर और अब…
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गिरगिट, अपराधबोध और कानकट्टा
आज सुबह से ही बड़ा दु:खी रहा। कहीं जाहिर नहीं किया, लेकिन वह बात बार-बार मुझे उलझाती रही, कि क्या…
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