नजरिया
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पृथ्वी दिवस पर घरों में बंद दुनिया
डॉ. अतुल शर्मा । आज धरती को रहने योग्य बनाये रखने के संकल्प का दिन। यह सांकेतिक है। धरती पर…
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हमें सोचना तो होगा…!!
दिल्ली में निर्भया कांड के बाद जिस तरह से तत्कालीन केंद्र सरकार सक्रिय हुई, नाबालिगों से रेप के मामलों पर…
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गैरसैंण से ऐसी ‘दिल्लगी’ ठीक नहीं
जब नेता ‘बहरूपिये’, अफसर ‘मौकापरस्त’ और जनता ‘मूर्ख’ हो जाए तो राजधानी के सवाल का स्थायी हल मिलना मुश्किल ही…
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किसे है सभ्य बने रहने की जरुरत
जमाने के साथ बदलते पहाड़ी संगीत के बहाने कई बार बहसें शुरू हुई। उनके अब तक भले ही पूरी तरह…
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लोक स्वीकृत रचना बनती है लोकगीत
लोकगीतों के संदर्भ में कहा जाता है, कि लोक जीवन से जुड़ी, लोक स्वीकृत गीत, कृति, रचना ही एक अवधि के बाद स्वयंमेव लोकगीत बन…
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नई लोकभाषा का ‘करतब’ क्यों ?
उत्तराखण्ड को एक नई भाषा की जरुरत की बात कई बार उठी। यह विचार कुछ वैसा ही है जैसे राज्य…
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गैरा बिटि सैंणा मा
उत्तराखण्ड की जनसंख्या के अनुपात में गैरसैंण राजधानी के पक्षधरों की तादाद को वोट के नजरिये से देखें तो संतुष्ट…
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भ्रष्टाचार, आदत और चलन
समूचा देश भ्रष्टाचार को लेकर आतंकित है, चाहता है कि भ्रष्टाचार खत्म हो जाए। मगर, सवाल यह कि भ्रष्टाचार आखिर…
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लो अब मान्यता भी खत्म
लो अब उक्रांद की राज्य स्तरीय राजनीतिक दल की मान्यता भी खत्म हो गई है। तो मान्यता खत्म होने के…
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फूल चढ़ाने तक की देशभक्ति
आज शहीद ए आजम भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू का शहादत दिवस था। देश के अन्य शहरों, कस्बों की तरह…
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