नजरिया
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घृणा, राजनीति और चहेते
आज एक राजनीतिक दल से जुड़े परिचित ने अपने स्मार्टफोन पर व्हाट्स अप से आई तस्वीर दिखाई। उनके नेता की…
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ये चन्द ..बहुमत पर भारी
लोग कह रहे हैं की इतना ईमानदार था तो कोटद्वार से मुछ्याल क्यूँ हारा …बात ये है की खुद में…
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अभी से बनाएं अपना मैनेफेस्टो
अगर कोई ऊंच नीच न हुई तो उत्तराखंड राज्य में अगला विधानसभा चुनाव 2017 में होगा। निश्चित ही तब सभी…
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राइट टू रिजैक्ट शुभ, मगर कितना…. ?
राइट टू रिजेक्ट स्वस्थ लोकतंत्र के लिए शुभ माना जा सकता है, मगर कितना? इस पर भी सोचा जाना चाहिए।…
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क्या यह चिंताएं वाजिब लगती हैं..
कोश्यारी जी को चिंता है कि यदि आपदा प्रभावित गांवों को जल्द राहत नहीं दी गई तो नौजवान माओवादी हो…
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कौन संभालेगा पहाड़ों को…
पहाड़ों पर कौन बांधेगा ‘पलायन’ और ‘विस्थापन’ को… अब तक या कहें आगे भी पलायन पहाड़ की बड़ी चिंता में…
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वाह रे लोकतंत्र के चौथे खंभे
मित्रों कभी कभी मुझे यह सवाल कचोटता है कि आखिर हम पत्रकारिता किसके लिए कर रहे हैं। निश्चित ही इसके…
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मूर्ति बहने का राष्ट्रीय शोक
ऋषिकेश में एक मूर्ति बही तो देश का पूरा मीडिया ने आसमान सर पर उठा लिया। खासकर तब जब…
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नेगी को ध्वजवाहक बताना कितना सही
उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी इन दिनों अपनी बिरादरी के निशाने पर हैं। उत्तराखंड के एक अन्य…
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आखिर कब तक बनेंगे दूसरों की ढाल
आखिर हम कब तक दूसरों के अतिरेक में घिरे रहेंगे, कभी किसी नेता के आभामंडल में, कभी किसी दल के,…
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