गेस्ट-कॉर्नर
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जब देहरादून आए थे राष्ट्रीय कवि ‘दिनकर’
(राष्ट्रीय कवि रामधारी सिंह दिनकर की पुण्यतिथि पर विशेष) – डॉ. अतुल शर्मा मेरे नगपति! मेरे विशाल! साकार दिव्य गौरव…
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सद्भाव के रंगों का पर्व है होली
प्रबोध उनियाल | फागुन पूर्णिमा को मनाए जाने वाला होली का पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष का अंतिम तथा जन…
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पहाड़ के गांवों की ऐसी भी एक तस्वीर
नरेंद्र कठैत// साहित्यिक दृष्टि से अगर उत्तराखण्ड की आंचलिक पृष्ठभूमि को स्थान विशेष के परिपेक्ष्य…
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20 साल बाद लौटी वेदनी बुग्याल की रौनक
– गुलाबी फूलों ने बिखेरी सुंदरता… – अनगिनत फूलों से बिखरी रंगत, पर्यटकों का इंतजार संजय चौहान // मानूसन की बारिश…
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राजशाही को हम आज भी ढो रहे
डॉ. अरुण कुकसाल/- ’हे चक्रधर, मुझे मत मार, घर पर मेरी इकत्या भैंस है जो मुझे ही दुहने देती है।…
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जहां आज भी धान कुटती हैं परियां
देवभूमि उत्तराखंड में अनगिनत, अद्भुत और चमत्कारिक स्थल हैं। उत्तराखंड में जनपद टिहरी के प्रतापनगर क्षेत्र का पीड़ी (कुंड) पर्वत…
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उत्तराखंड में आज भी जारी है ‘उमेश डोभालों’ की जंग
सत्तर के दशक में गढ़वाल विश्वविद्यालय का मेघावी छात्र उमेश डोभाल कलम के चश्के के कारण घुमन्तू पत्रकार बन गया।…
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मछेरा जाल लपेटने ही वाला है
गढ़वाली लोक साहित्य के शिखर, डा. गोविंद चातक पर विशेष ‘जब सभ्यता बहुत सभ्य हो जाती है तो वह अपनी…
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नशे से इतर भांग की खेती के हैं कई फायदे
उत्तराखंड की पूर्ववर्ती सरकार ने कारोबारी तौर पर भांग की खेती के लिए कदम उठाए ही थे, कि भद्रजनों और…
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अगर हम किताबें नहीं पढ़ेंगे…
जो लोग किताबें नहीं पढ़ते, वे अंततः राम-रहीम को जन्म देते हैं। हमारे समाज में राम-रहीम पैदा होते हैं, क्योंकि…
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