साहित्य
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गढ़वाली कहानीः छठों भै कठैत की हत्या!
प्रतीकात्मक चित्र • भीष्म कुकरेती / हौर क्वी हूंद त डौरन वैक पराण सूकि जांद पण मेहरबान सिंग कठैत…
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समीक्षाः जीवन के चित्रों की कथा है ‘आवाज रोशनी है’
बचपन की स्मृतियां कभी पीछा नहीं छोड़तीं। कितना भी कहते रहो ’छाया मत छूना मन’ मन दौड़ता रहता है दादी,…
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गढ़वाली, कुमाउनी और जौनसारी की शब्दावली में विदेशी भाषाओं के शब्द
संकलन- भीष्म कुकरेती अरबी और इरानी शब्द अ- अक्षर से शब्द – अदब , अमरुद , अब्बल , असर ,…
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जसपुर के बहुगुणाओं का गढ़वाली टीका साहित्य में योगदान
• भीष्म कुकरेती गढ़वाली साहित्यकार एवं इतिहासकार अबोध बंधु बहुगुणा ने ’गाड म्यटेकी गंगा’ पुस्तक में संस्कृत ज्योतिष व कर्मकांड…
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माँ अब कुछ नहीं कहती – (हिंदी कविता)
माँ अब कभी-कभी आती है सपनों में चुप रहती है, कुछ नहीं कहती माँ सुनाती थी बातों-बातों में जीवन के…
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अब….!
गिर्दा !आपने कहा थाहमारी हिम्मत बांधे रखने के लिए‘जैंता इक दिन त आलो ये दिन ये दुनि में’ तब से…
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साहित्यकारों के कमरों की कहानी ‘मेरा कमरा’
प्रबोध उनियाल द्वारा संपादित ‘मेरा कमरा’ चालीस लेखकों के अपने अध्ययन कक्ष के संबन्ध में सुखद-दुःखद अनुभवों को समेटे पठनीय…
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त्राही-त्राही त्राहिमाम… (गढ़वाली कविता)
• दुर्गा नौटियाल त्राही-त्राही त्राहिमाम, तेरि सरण मा छां आज। कर दे कुछ यनु काज, रखि दे हमारि लाज।। संगता…
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मैं पहाड़ हूं (हिन्दी कविता)
• मदन मोहन थपलियाल ’शैल’ मैं पहाड़ (हिमालय) हूं विज्ञान कहता है यहां पहले हिलोरें मारता सागर था दो भुजाएं…
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महा क्रांति आमंत्रित कर (हिन्दी कविता)
• श्रीराम शर्मा ‘प्रेम’ तेरे शोणित, तेरी मज्जा से – सने धवल प्रासाद खड़े। तेरी जीवन से ही निर्मित, तेरी…
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