साहित्य

  • न्युतो

    दगड्यों! पैथ्राक दस सालों बटि नामी-गिरामी चिट्ठी-पतरी(गढ़वळी पत्रिका) कि गढ़वळी भाषै बढ़ोत्तरी मा भौत बड़ी मिळवाक च। यीं पतड़ीन्‌ गढ़वळी…

    Read More »
  • स्वागत सत्कार

    नयि सदी नया बरस तेरु स्वागत तेरु सत्कार हमरा मुल्क कि मोरी मा नारेंण खोळी मा गणेश चौंरौं कि शक्ति…

    Read More »
  • चौंठी भुक्कि

    छौं मि ये ही मुल्क कु, भुलिग्यों यख कि माया भुलिग्यों वा चौंठी भुक्कि, कोख जैंन मि खिलाया कन नचदा…

    Read More »
  • दारु

    दारु ! पगळीं च बगणि च डांडी कांठ्यों धरु-धरु पीड़ बिसरौण कु माथमि, द्यब्तौं सि सारु गंगा उंद बगदी दारु…

    Read More »
  • सौदेर

    माया का सौदेर छां हम इन्कलाब जिन्दाबाद बैर्यों बग्तौ चेति जावा निथर होण मुर्दाबाद कथगै अंधेरू होलु हम उज्याळु कैद्योंला…

    Read More »
  • फेक्वाळ्

    भुयां खुट्ट धन्नौ जगा नि अंरोंगु कखि छोड़युं नि संगति फैल्यान् सेमा सि फेक्वाळ् धुर्पळा कि पठाळी उठा चौक का…

    Read More »
  • सिखै

    सि हमरा बीच बजार दुकानि खोली भैजी अर भुला ब्वन्न सिखीगेन मि देळी भैर जैकि भैजी अर भुला ब्वन्न मा…

    Read More »
  • पण कब तलक

    मेरा बिजाल्यां बीज अंगर्ला सार-खार मेरि भम्मकली गोसी कबि मेरु भुक्कि नि जालू कोठार, दबलौं कि टुटलि टक्क पण, कब…

    Read More »
  • बाघ

    बाघ   गौं मा     जंगळुं मा मनखि    ढुक्यां छन रात–दिन  डन्ना छन घौर–बौण द्‌वी    लुछणान्‌ एक हैंका से आज–भोळ     अपणा…

    Read More »
  • काव्य आन्दोलनों का युग १९७६- से २०१० तक

    सन १९७६ से २०१० तक भारत को कई नए माध्यम मिले और इन माध्यमों ने गढ़वाली कविता को कई तरह…

    Read More »
Back to top button