साहित्य
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अनसिक्योर्टी
डाल्यों फरैं अंग्वाळ बोट ताकि, डाल्यों तैं अनसिक्योर्टी फील न हो Copyright@ Dhanesh Kothari
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मेरि पुंगड़्यों
मेरि पुंगड़्यों हौरि धणि अब किछु नि होंदपण, नेता खुब उपजदन् मेरि पुंगड़्यों बीज बिज्वाड़खाद पाणिलवर्ति-मंड्वर्ति किछु नि चैंदस्यू नाज पाणि…
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१९५१ से १९७५ तक
सारे भारत में स्वतंत्रता उपरान्त जो बदलाव आये वही परिवर्तन गढ़वाल व गढ़वाली प्रवासियों में भी आये, स्वतंत्रता का सुख,…
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१९२५ से १९५० का काल
सामाजिक स्थिति तो वही रही किन्तु स्थितियों में गुणकारक वृद्धि हुई। याने की शिक्षा वृद्धि, उच्च शिक्षा के प्रति प्रबल…
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१८५० ई. से १९२५ ई. तक
गढवाली में आधुनिक कविताएँ लिखने का आरम्भ ब्रिटिशकाल में ही शुरू हुआ। हाँ १८७५ ई. के बाद प. हरिकृष्ण रुडोला,…
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पूर्व – आधुनिक काल
गढवाली साहित्य का आधुनिक काल १८५० ई. से शुरू होता है। किन्तु आधुनिक रूप में कविताएँ पूर्व में भी रची…
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आधुनिक कविता इतिहास
यद्यपि गढवाली कविता कि समालोचना एवं कवियों कि जीवनवृति लिखने कि शुरुआत पंडित तारादत्त गैरोला ने १९३७ ई. से की…
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नाथ संप्रदायी साहित्य का प्रभाव
चूँकि गढवाल में नाथ सम्प्रदाय का प्रादुर्भाव सातवीं सदी से होना शुरू हो गया था और इस साहित्य ने गढ़वाल…
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नाथपंथी साहित्य सन्दर्भ
बगैर नाथपंथी साहित्य सन्दर्भ रहित लेख गढवाली कविता इतिहास नहीं डा. विष्णु दत्त कुकरेती के अनुसार नाथ साहित्य में ढोलसागर,…
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लोकसाहित्य में मनोविज्ञान एवं दर्शन
नाथपन्थी साहित्य और गढ़वाली लोकसाहित्य में मनोविज्ञान एवम दर्शनशास्त्र नाथपंथी साहित्य आने से गढवाली भाषा में मनोविज्ञान और दर्शनशास्त्र की…
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