साहित्य
-
गढ़वाली की आदिकाव्य शैली
गढवाली भाषा का आदिकाव्य (Prilimitive Poetry) बाजूबंद काव्य है जो की दुनिया की किसी भी भाषा कविता क्षेत्र में लघुतम…
Read More » -
आधुनिक गढ़वाळी कविता का इतिहास
गढवाली भाषा का प्रारम्भिक काल गढवाली भाषायी इतिहास अन्वेषण हेतु कोई विशेष प्रयत्न नही हुए हैं, अन्वेषणीय वैज्ञानिक आधारों पर…
Read More » -
समौ
चंदरु दिल्ली बिटि घौर जाणों तय्यार छौ, अर वेका गैल मा छौ तय्यार ’झबरु’। झबरु उमेद कु पाळ्यूं कुत्ता छौ।…
Read More » -
शब्द हैं……
पहरों में कुंठित नहीं होते शब्द मुखर होते हैं गुंगे नहीं हैं वे बोलते हैं शुन्य का भेद खोलते हैं उनके…
Read More » -
कागजि विकास
घाम लग्युं च कागजि डांडों काडों कि च फसल उगिं आंकड़ों का बांगा आखरुं मा उखड़ कि भूमि सेरा बणिं…
Read More » -
उत्तराखण्ड बणौंण हमुन्
अब कैकू नि रोण हमुन उत्तराखण्ड बणौंण हमुन उजाड़ कुड़ि पुंगड़्यों तैं उदास अळ्सी मुखड़्यों तैं फूल अरोंगि पंखड़्यों तैं…
Read More » -
गांधीवाद
सि बिंगौंणा छन गांधीवाद अपनावा बोट देण का बाद गांधी का तीन बांदरूं कि तरां आंखा-कंदुड़/ अर मुक बुजिद्यावा Source…
Read More » -
सांत्वना
दो पीढ़ियों का इन्तजार आयेगा कोई समझायेगा कि उनके आ जाने तक भी नहीं आया था विकास गांव वाले रास्ते…
Read More » -
पहाड़
मेरे दरकने पर तुम्हारा चिन्तित होना वाजिब है अब तुम्हें नजर आ रहा है मेरे साथ अपना दरकता भविष्य लेकिन…
Read More » -
अब तुम
अब तुम सिंग ह्वेग्यां रंग्युं स्याळ् न बण्यांन् सौं घैंटणौं सच छवां कखि ख्याल न बण्यांन् उचाणा का अग्याळ् छवां…
Read More »