साहित्य

  • बसन्त

    बसन्त हर बार चले आते हो ह्‍यूंद की ठिणी से निकल गुनगुने माघ में बुराँस सा सुर्ख होकर बसन्त दूर…

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  • नन्हें पौधे

    प्लास्टिक की थैलियों में उगे नन्हें पौधे आपकी तरह ही युवा होना चाहते हैं दशकों के बाद बुढ़ा जाने की…

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  • पहाड़ आवा

    हमरि पर्यटन कि दुकानि खुलिगेन पहाड़ आवा हमरि चा कि दुकान्यों मा ‘तू कप- टी’ बोली जावा पहाड़ आवा हमरा…

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  • चुसणा मा…….

    बस्स बोट येक दे ही द्‍या हात ज्वड़्यां खुट्टम् प्वड़दां बक्कै बात हमुन जाणि किलै कि/ भोळ् त चुसणा मा…

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  • लोक – तंत्र

    हे रे लोकतंत्र कख छैं तू अजकाल गौं मा त्‌ प्रधानी कि मोहर वीं कू खसम लगाणु च बिधानसभा मा…

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  • सोरा

    सोरा भारा कैका ह्वेन जैंन माणिं सि बुसेन कांद लगै उकाळ्‍ चढै़ तब्बि छाळों पर घौ लगैन दिन तौंकु रात…

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  • बणिगे डाम

    १ बणिगे डाम लगिगे घाम प्वड़िगे डाम मिलिगेन दाम २ सिद्ध विद़द खिद्वा गिद्ध उतरिगेन लांकि मान ३ सैंन्वार खत्म…

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  • मार येक खैड़ै

    तिन बोट बि दियाली तिन नेता बि बणैयाली अब तेरि नि सुणदु त मार येक खैड़ै ब्याळी वु हात ज्वड़दु…

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  • पांसा

    १ रावण धरदा बनि-बनि रुप राम गयां छन भैर चुरेड चुडी पैरौणान सीता देळी मु बैठीं डौर २ अफ्वीं बुलौंदी…

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  • म्यारा डेरम

    म्यारा डेरम गणेश च चांदरु नि नारेण च पुजदारु नि उरख्याळी च कुटदारु नि जांदरी च पिसदारु नि डौंर थाळी…

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