साहित्य
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मारियो वार्गास ल्योसा की कृति ‘किस्सागो’ का परिचय
● डॉ. अतुल शर्मा ‘किस्सागो’ मारियो वार्गास ल्योसा का महत्वपूर्ण उपन्यास लातिन अमरीकी देश ‘पेरु’ के आदिवासियों पर आधारित है।…
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आधुनिक गढ़़वाली कविता का संक्षिप्त इतिहास
भीष्म कुकरेती (मुंबई) // गढ़़वाली भाषा का प्रारम्भिक काल गढ़़वाली भाषाई इतिहास अन्वेषण हेतु कोई विशेष प्रयत्न नहीं हुए हैं।…
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मान राम (हिन्दी कविता)
अनिल कार्की // मानराम ! ओ बूढ़े पहाड़ लो टॉफी खा लो चश्मा पौंछ लो मेरे पुरखे टॉफी की पिद्दी…
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हमर गौंम (गढ़वाली कविता)
केशव डुबर्याळ ‘मैती’// हमर गौंम, आइडिया नेटभर्क च, गोर, बछरू, भ्याल हकै, मनखि निझर्क च। हमर गौंम, पीडब्ल्डी सड़क च,…
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चुनौ बाद (गढ़वाली कविता)
धनेश कोठारी // बिकासन बोलि परदान जी! मिन कबारि औण ? पैलि तुमारा घौर औण कि/ गौं मा औण? अबे!…
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इंसानी जीवन के रेखांकन की कविताएं
पुस्तक समीक्षा- जलड़ा रै जंदन (गढ़वाली कविता संग्रह) डॉ. नंद किशोर हटवाल // कविताओं को अपने समय और समाज का…
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गैळ बळद (गढ़वाली कविता)
आशीष सुंदरियाल// जब बटे हमरु गैळ बळ्द फेसबुक फर फेमस ह्वे तब बटि वो बळ्द/ बळ्द नि रै सेलिब्रिटी बणिगे…
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दाताs ब्वारि, कनि दुख्यारि (गढ़वाली कहानी)
कथाकार – भीष्म कुकरेती // गौं मा इन कबि नि ह्वे. इन कैन बि कबि नि देखी. हाँ बुन्याल त-…
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मैंने या तूने (हिन्दी कविता)
प्रदीप रावत ‘खुदेड़’ // मैंने या तूने, किसी ने तो मशाल जलानी ही थी चिंगारी मन में जो जल रही…
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अब त वा (गढ़वाली ग़ज़ल)
प्रदीप सिंह रावत ‘खुदेड़’ // अब त वीं लोळी तै हमारि याद बि नि सतांदी, अब त वा लोळी हमते…
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