साहित्य
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पीले पत्ते
कवि- प्रबोध उनियाल पतझड़ की मार झेल रहे अपने आंगन में नीम के पेड़ के पत्तों को पीला होते हुए…
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मनखि (गढ़वाली-कविता) धर्मेन्द्र नेगी
विकास-विकास चिल्लाण लैगे मनखि बिणास बुलाण लैगे घौ सैणैं हिकमत नि रैगे वेफर हिंवाळ आँखा घुर्याण लैगे उड्यार पुटग दम…
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तन के भूगोल से परे
निर्मला पुतुल/ तन के भूगोल से परे एक स्त्री के मन की गांठें खोलकर कभी पढ़ा है तुमने उसके भीतर…
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ग़ज़ल (गढ़वाली)
दिनेश कुकरेती (वरिष्ठ पत्रकार) – जख अपणु क्वी नी, वख डांडा आगि कु सार छ भैजी, जख सौब अपणा सि…
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जैसे को तैसा
( लघुकथा ) गांव में एक किसान रहता था जो दूध से दही और मक्खन बनाकर बेचने का काम करता…
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हमरु गढ़वाल
कवि श्री कन्हैयालाल डंडरियाल खरड़ी डांडी पुन्गड़ी लाल धरती को मुकुट भारत को भाल हमरु गढ़वाल यखै संस्कृति – गिंदडु,…
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शुक्रिया कहना मां
आशीष जोशी ने अपनी वॉल पर एक हृदय विदारक कविता शेयर की है। रचनाकार के बारे में वह नहीं जानते…
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‘गीतेश’ की कविताओं में बच्चे सा मचलता है ‘पहाड़’
युवा ‘गीतेश सिंह नेगी’ का प्रारंभिक परिचय गढ़वाली कवि, गीतकार, गजलकार, जन्म-फिरोजपुर, मूल निवास- महरगांव मल्ला, पौड़ी गढ़वाल, संप्रति- भू-भौतिकविद,…
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सिंह ग्रन्थावली’: भजनसिंह ‘सिंह’ के कृत्तित्व का साक्षात्कार
‘सिंह ग्रन्थावली’ नाम से गढ़वाली भाषा साहित्य का महत्वपूर्ण ग्रन्थ प्रकाशित हुआ है। गढ़वाली साहित्य के युगपुरुष भजन सिंह ‘सिंह’…
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अपण ब्वे का मैस
अपण ब्वे का मैस/ होला वो/ जो हमरि जिकुड़ि मा घैंटणा रैन/ घैंटणा छन कीला/वाडा/दांदा! जो, हमारा नौ फर, कागज…
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