साहित्य
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जादूगर खेल दिखाता है
जादूगर खेल दिखाता है अपने कोट की जेब से निकालता है एक सूर्ख फूल और बदल देता है उसे पलक…
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ओ साओ ! तुम कैक छा ?
पहाड़ के रसूल हमताजोव हैं शेरदा अनपढ़ तुम सुख में लोटी रया, हम दुःख में पोती रयां ! तुम स्वर्ग,…
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दाज्यू मैं गांव का ठैरा
अनिल कार्की// पहाड़ में रहता हूं गांव का ठैरा दाज्यू में तो पीपल की छांव सा ठैरा ओल्ले घर में…
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ग़ज़ल
दुष्यंत कुमार // तुम्हारे पांव के नीचे कोई जमीन नहीं, कमाल ये है कि फिर भी तुम्हें यकीन नहीं ।।…
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मेरो हिमालय
म्यारा ऊंचा हिमालय तै शांत रैण द्या नि पौंछावा सड़की पुंगड़ी – कूड़ी नि दब्यौण द्या, म्यारा ऊंचा हिमालय तै…
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अस्पताल
सुविधा त सबि छन यख अजगाल अस्पताल मा डागटर च दवे च कंपौंडर च यख तक कि नर्स अर आया…
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अथ श्री उत्तराखंड दर्शनम्
नेत्र सिंह असवाल // जयति जय-जय देवभूमि, जयति उत्तराखंड जी कांणा गरूड़ चिफळचट्ट, मनखि उत्तणादंड जी। तेरि रिकदूंल्यूं की जै-जै,…
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वह दूसरे जन्म में पानी को तरसती रही
एक परिवार में दो महिलाएं जेठानी और देवरानी रहती थी। जेठानी बहुत दुष्ट और देवरानी शिष्ट, सौम्य, ईमानदार व सेवा…
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“सुबेर नि हूंदि“ (गज़ल)
काम काज़ा की अब कैथै देर नि हूंदि अजकाल म्यारा गौं मा सुबेर नि हूंदि घाम त तुमरि देळमि कुरबुरि…
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