साहित्य

  • गुलज़ार साहब की कविता “गढ़वाली” में

    लोग सै ब्वळदिन, ब्यठुला हैंकि बानि का उलखणि सि हुंदिन । सर्या राति फस्सोरिक नि सिंदिन, कभि घुर्यट त कबरि…

    Read More »
  • गोर ह्वेग्यो हम

    जैकि मरजि जनै आणी, वु उनै लठ्याणूं छ जैकि गौं जनै आणी, वु उनै हकाणू छ ज्वी जनै पैटाणू छ,…

    Read More »
  • हत्यारी सडक

    अतुल सती//  ऋषिकेश से लेकर  बद्रीनाथ तक  लेटी है नाग की तरह  जबडा फैलाये  हत्यारी सडक  राममार्ग 58  रोज माँगती…

    Read More »
  • काफल पाको ! मिन नि चाखो

    ‘काफल‘ एक लोककथा  उत्‍तराखंड के एक गांव में एक विधवा औरत और उसकी 6-7 साल की बेटी रहते थे। गरीबी में किसी तरह दोनों…

    Read More »
  • सामयिक गीतों से दिलों में बसे ‘नेगी’

            अप्रतिम लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के उत्तराखंड से लेकर देश दुनिया में चमकने के कई कारक माने जाते हैं.…

    Read More »
  • झड़ने लगे हैं गांव

    चारू चन्द्र  चंदोला// सूखे पत्तों की तरह झड़ने लगे हैं यहाँ के गाँव उजड़ने लगी है मनुष्यों की एक अच्छी…

    Read More »
  • हे रावण

    रावण तुम अब तक जिंदा हो, तुम्हें तो मार दिया गया था त्रेता में. … उसके बाद भी सदियों से…

    Read More »
  • जै दिन

    जै दिन मेरा गोरू तेरि सग्वाड़यों, तेरि पुंगड़यों उजाड़ खै जाला जै दिन झालू कि काखड़ी चोरे जालि जै दिन…

    Read More »
  • जब प्रेम में जोगी बन गया एक राजा

    राजुला-मालूशाही पहाड़ की सबसे प्रसिद्ध अमर प्रेम कहानी है। यह दो प्रेमियों के मिलन में आने वाले कष्‍टों, दो जातियों, दो देशों, दो…

    Read More »
  • वुं मा बोली दे

    गणेश खुगसाल ‘गणी’ गढ़वाली भाषा के लोकप्रिय और सशक्त कवि हैं। ‘वुं मा बोली दे’ उनकी प्रकाशित पहली काव्यकृति है। शीर्षक…

    Read More »
Back to top button