साहित्य

  • ये जो निजाम है

    ये जो निजाम है तुझको माफ़ कर देगा खुद सोच क्या तू खुद को माफ़ कर देगा बारिशों में भीग…

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  • मैं हंसी नहीं बेचता

    जी हां मैं हंसी नहीं बेचता न हंसा पाता हूं किसी को क्‍योंकि मुझे कई बार हंसने की बजाए रोना…

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  • वह आ रहा है अभी..

    कुछ लोग कह रहे हैं तुम मत आओ वह आ रहा है अभी उसके आने से पहले तुम आओगे, तो…

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  • हां.. तुम जीत जाओगे

    हां..  निश्चित ही तुम जीत जाओगे क्योंकि तुम जानते हो जीतने का फन साम, दाम, दंड, भेद तुम्हें सिर्फ जीत…

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  • हाइकू

    खारु छौं न खरोळ भितर आग च कॉपीराइट- धनेश कोठारी

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  • सर्ग दिदा

    सर्ग दिदा पाणि पाणि हमरि विपदा तिन क्य जाणि रात रड़िन्‌ डांडा-कांठा दिन बौगिन्‌ हमरि गाणि उंदार दनकि आज-भोळ उकाळ…

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  • बसंत

    लो फिर आ गया बसंत अपनी मुखड़ी में मौल्‍यार लेकर चाहता था मैं भी अन्‍वार बदले मेरी मेरे ढहते पाखों…

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  • सिखै

    सिहमरा बीच बजार दुकानि खोलि भैजी अर भुल्‍ला ब्‍वन्‍न सिखीगेन मिदेळी भैर जैक भैजी अर भुल्‍ला व्‍वन्‍न मा सर्माणूं सिखीग्‍यों…

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  • तय मानों

    तय मानों देश लुटेगा बार-बार, हरबार लुटेगा तब-तब, जब तक खड़े रहोगे चुनाव के दिन अंधों की कतारों में समझते…

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  • बाबा केदार के दरबार में

    जगमोहन ‘आज़ाद‘//  खुद के दुखों का पिटारा ले खुशीयां समेटने गए थे वो सब जो अब नहीं है…साथ हमारे,बाबा केदार के…

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